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विवादों के निपटारे एवं सस्ता व शीघ्र न्याय प्रदान करने की वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लोक अदालत की प्रासंगिकता – एक अध्‍ययन (धमतरी जिले, (भारत) के विशेष संदर्भ में)

Author Affiliations

  • 1बी.सी.एस. शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविधालय धमतरी (छ.ग.), भारत

Res. J. Language and Literature Sci., Volume 6, Issue (2), Pages 1-11, May,19 (2019)

Abstract

न्यायालयों के पास मुकद्रमों की बढती हुई संख्‍या एवं न्‍यायालयों की जटिल एवं खर्चीली प्रक्रिया के विकल्‍प के रूप में विवादों के निपटाने की सस्‍ती एवं शीध्र न्‍याय प्रदान करने की वैकल्पिक व्‍यवस्‍था के रूप में लोक अदालत का महत्‍व वर्तमान परिपेक्ष्‍य में निरन्‍तर बढता जा रहा है एवं विवाद के पक्षकार इनके प्रति बहुत आकर्षित हो रहे है साथ ही पूरे देश में एक ही दिन प्रत्‍येक जिले में समय-समय पर आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालतों को भूमिका भी विवादों को शीध्र निपटाने की दिशा में निरंतर बढती जा रही है| लोक अदालत के निर्णय विवादों के दोनों पक्षकार पर बंधनकारी होते है इनमें आपसी समझौते के आधार पर सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों का निराकरण कर दिया जाता है| राजस्‍व, श्रम, विघुत, मोटर व्‍हीकल, क्षतिपूर्ति जैसे मामले बहुत ही आसानी से आपसी समझौते से निपटा दिये जाते है| कुछ आलोचनाओं के बावजूद इनकी उपयोगिता से इंकार नहीं किया जा सकता| विधिक सेवा प्राधिकारण द्वारा इन्‍हें विधिक स्‍वरूप प्रदान करने के बाद इनका महत्‍व दिन प्रतिदिन बढता चला जा रहा है आवश्‍यकता केवल इस बात की है कि उन कमियों को दूर कर लिया जाए जो इनकी लोकप्रियता एवं उपयोगिता में बाधक है साथ ही इनका अधिक से अधिक विभिन्‍न माध्‍यम से प्रचार प्रसार कर आम जनता का भी पूर्ण सहयोग प्राप्‍त किया जाए|

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