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हृदय घात की रोकथाम में हस्त योग मुद्रा का हृदय और मस्तिष्क सम्बन्धी मानकों पर प्रभाव

Author Affiliations

  • 1शिवोमा आश्रम, 83 द्वारकापुरी, 20x40 ब्लॉक लाइन, इन्दौर, म.प्र., भारत
  • 2शाह पैथोलोजी, 410, नंदलालपुरा चौराहा, जवाहर मार्ग, इन्दौर, म.प्र., भारत
  • 3डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोकेमिस्ट्रीएंड बायोफिजिक्स, युनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफोर्निया, सेन फ्रांसिस्को, सीए, यूएसए
  • 4सीएचएल हॉस्पिटल, डिपार्टमेंट ऑफ़ माइक्रोबायोलॉजी, एबी रोड़, नियर एलआईजी स्क्वेअर,इन्दौर, म.प्र., भारत
  • 5कलंत्री नर्सिंग होम, 219, जवाहर मार्ग, इन्दौर, म.प्र., भारत

Res. J. Language and Literature Humanities, Volume 4, Issue (4), Pages 1-6, April,19 (2017)

Abstract

हृदय घात विश्व में मृत्यु का प्रमुख कारण है तथा प्रतिदिन इस प्रकार के प्रकरण बढ़ते जा रहे हैं। हस्त योग मुद्रा हृदय घात, रक्तचाप, मधुमेह एवं अन्य बहुत सी बीमारियों की रोकथाम में सकारात्मक रूप से सहायक सिद्ध हो रही है। हमारे इस अध्ययन में, 41 महिला वपुरुष (27 सामान्य व 14 हृदय रोगी) जिनकी उम्र ३०-६५ वर्ष है, सम्मिलित किया है। सभी पर निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत हस्त योग मुद्राकराई गई एवं प्रक्रिया के पूर्व व पश्चात हृदय तथा मस्तिष्क सम्बन्धी मानकों को रिकॉर्ड किया गया। हृदय रोगियों में सिस्टोलिक, डायस्टोलिक रक्तचाप, हृदय गति व रक्त के चिपचिपेपन में प्रभावशाली कमी आई है। इसके साथ ही रक्त छिड़काव की मात्रा, कोरोनरी छिड़काव का दबाव, मस्तिष्क के ऊतकों में रक्त संचार व स्मृति सूचकांक में वृद्धि हुई। हमारा यह मानना है कि यह हस्त योग मुद्रा अंगुलियों में स्थित तंत्रिका के माध्यम से शरीर में अनुकूल प्रभाव उत्पन्न करती है। अंगुलियों की परस्पर क्रिया हृदय प्रणाली पर अनुकूल प्रभाव बनाती है और इसे बेहतर करती है। मरीज़ को अचानक हृदय घातहोने की स्थिति में एवं चिकित्सालय में भर्ती होने से पहले प्राथमिक सहायक चिकित्सा (प्राइमरी सपोर्टिव मेडिकल एड) के रूप में इस हस्त योग मुद्रा का उपयोग आपातकालीन उपकरण के रूप में किया जा सकता है। क्यूँ की यह मुद्रा मृत्यु पर संभावित विजय है अतः इस मुद्रा को "V" मुद्रा के नाम से प्रतिपादित किया गया है। " V " अर्थात –( मृत्यु पर )विजय ।

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